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मेरा मुक्कदर थोड़े बदल गया है

मेरा मुक्कदर थोड़े बदल गया है

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(एसिड अटैक पीड़ित महिला के शक्तिशाली शब्द)

चेहरा मेरा ज़रूर जल गया है

तो क्या हुआ !!! मेरा मुक्कदर थोड़े बदल गया है


हुई थी मैं किसी की नफरत की शिकार

पता नहीं क्यों उसने रखा था मेरे लिए अपने दिल में इतना गुबार

बताई थी मर्ज़ी अपनी, बस क्या इसीलिए मिला मुझे ये प्रतिकार

ऐसे इंसानों के ज़मीर ने क्या नहीं दिया होगा उसे धिक्कार

चलो ठीक है!!! कम से कम समाज का असली चेहरा मुझे दिख गया है

चेहरा जला है मेरा…..पर मेरा मुक्कदर थोड़े बदल गया है

 

ये मत समझो मेरी ख़ूबसूरती कम हो गयी है

चमड़ी जली है मेरी रूह थोड़े बदल गयी है

ज़िन्दगी की इस तपिश से ये मिटटी की गुड़िया अब फौलाद बन गयी है

मेरे हौसलों को नयी बुलंदियां मिल गयी है

ज़िन्दगी जितने का एक नया जज्बा मुझे मिल गया है

चेहरा जला है मेरा….पर मेरा मुक्कदर थोड़े बदल गया है


मैं फिर अपने पंख फैलाउंगी

इस धूल से उठाकर फिर मैं एक लम्बी छलांग लगाउंगी

तारीख गवाही दे जिसकी ज़िन्दगी को एक ऐसी मिसाल बनाउंगी

अब नहीं रुकूंगी कभी, जो डर था वो अब निकल गया है

चेहरा जला है मेरा….पर मेरा मुक्कदर थोड़े बदल गया है


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महिलाओं को लक्षित करने वाले एसिड हमलों में भारत वैश्विक चार्ट में सबसे ऊपर है। कठोर कानूनों और कठोर दंड के बावजूद, उपमहाद्वीप पर इस तरह के हमलों की संख्या में वृद्धि जारी है। 2014 और 2018 के बीच, देश में एसिड हमलों के 1,483 शिकार हुए हैं। यह राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार है।

आओ एक आवाज बने, मिलकर इस जुर्म के खिलाफ अपना सीना तने


Tushar Dubey

एक आवाज़ हूँ!!!!!!! तुम्हे जगाने आया हूँ

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