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नशा कोई फैशन नहीं बल्कि विनाश का रास्ता हैं

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जब हमारा मन मस्तिष्क जीवन की प्रतिकूलताओं को अनुकूलता में बदलने के लिए जोड़ तोड़ बैठाता है, अथवा वास्तविक जीवन की प्रवृत्तियों से पलायन करके समस्याओं से भागकर हम कुछ गलत उपाय अपनाते हे इन उपायों में नशा प्रमुख कारक हैं। वास्तव में नशा वह भयावह स्थिति है जिसका भविष्य पूर्ण मृत्यु हैं। गली-मुहल्लें से लेकर रेलगाड़ी के ड़िब्बों में, कचरों के ढ़ेर के पास, उच्च सरकारी जगहों पर प्रत्येक वर्ग के व्यक्ति किसी न किसी रूप में नशा करते हए मिल जाएगें। परन्तु हम इसका विरोध तब करेंगे जब नशा करने वाला व्यक्ति हमारा परिचित होगा। लेकिन हम यह भुल जाते है कि नशा करने वाला व्यक्ति हमारे घर का नहीं तो समाज का तो हिस्सा हैं। चाहे किसी भी तरह का नशा हो इंसान को इस दलदल में एक कदम रखने की देर हैं। जहाँ आपने एक कदम रखा नहीं फिर आप स्वयं इसके इतने आदि हो जाएगें की इस दलदल में धंसते चले जाएगें। शराब, गांजा, भांग, अफीम, जर्दा, गुटखा, तम्बाकु, बीड़ी सिगरेट, हुक्का, चिलम, चरस, स्मैक, कोकिन, ब्राउन-शुगर, जैसे घातक पद्धार्थो का प्रयोग नवयुवक, युवतियाँ, प्रौढ़ शौक से व, तनाव समाप्त करने के लिए भी करते हैं। इसे उच्च सोसायटी का शौकिया फैशन स्वीकारते "अपना नहीं तो परिवार का ख्याल करो

नशा छोड़कर, सबका कल्याण करो।"

आज की युवा पीढ़ी नशे की लत मे दिनबदिन डूबती जा रही है परिणामस्वरूप कई युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया हैं। वे गर्त मे जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक लोग, नशे का सेवन करने से, रोड दुर्घटना में मौत के मुँह मे चले जाते हैं। लगभग 30,000 से ज्यादा लोग कैंसर जैसी भयानक एवं लाइलाज़ बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं। इसके अलावा 1.4 लाख से अधिक लोगो की मृत्यु हो जाती हैं। यह आंकड़ा प्रतिवर्ष तेजी से बढ़ता ही जा रहा है। सरकार एवं विभिन्न संस्थान इस दिशा मे अथक प्रयास कर रहे है ,परन्तु वे काफी नहीं हैं।यद्यपि इन नशीलें पद्धार्थो पर लिखी चेतावनी सभी को सजग करती हैं फिर भी व्यक्ति शौकिया तौर पर इसका इतना आदी हो जाता है कि यदि एक समय बाद वह इसका सेवन न भी करें तो नशें की तलब उसे सब कुछ करा देती हैं। समृद्ध परिवार नशे की आदत के कारण जमीन, जायदाद, खेत खलिहान, रूपये पैसा, जेवरात सब समाप्त कर देता है। कई घरों में तो मेहमानों का स्वागत भी बीड़ी, सिगरेट, शराब के रूप में किया जाता हैं।


आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ व्यक्ति शौकिया तौर पर सिर्फ मौज-मस्ती के लिए, अधिकांश व्यक्ति सोसायटी में दिखावें के लिए, कुछ लोग किसी विशेष अवसर या दिन में किसी एक समय, कुछ बुरी संगती का भी साथ नहीं छोड़ने के कारण, कुछ लोग सीमित व संतुलित रहते हुए भी समाज में इस आदत को छिपाते हुए, कुछ व्यक्ति अतिरेकता में बहकते हुए स्वच्छन्द होकर कुछ दुःख, उलझन, परेशानी को समाप्त करने के लिए इन मादक पद्धार्थो का सेवन करते हैं। कितनी शर्मनाक बात तो यह हे कि कई बार तो हम में से कई व्यक्ति विशेष विशिष्ट समारोह मे, त्यौहारों में अपना स्वयं का उच्च स्तर दिखाने के लिए स्वयं नशा तो करते हि हे साथ हि मेहमान नवाजी के तौर पर सामने वाले व्यक्ति को भी मादक पद्धार्थ बीड़ी, सिगरेट, शराब प्रस्तुत करते हैं।अपनी दुश्मनी निकालने के लिए,सामने वाले व्यक्ति से गोपनीय अन्र्तमन कि बाते निकालने के लिए भी नशा करवाया जाता हैं। कई जगह तो बच्चों से नशीली वस्तुएँ मंगवाकर ही बच्चों को नशे की तरफ धकेला जाता हैं। कई जगह तो पिता पुत्र के साथ एक टेबल पर बैठकर शराब का सेवन करते हैं। कई बार तो ईष्या के तहत व्यक्ति की प्रगति रोकने के लिए निःशुल्क नशा कराकर इसकी लत लगाई जाती हैं। समाज में पनप रहे, विभिन्न प्रकार के अपराधों का एक कारण नशा हैं।

"उम्मीद हे न कोई आशा , अब चारों और निराशा हैं। बर्बाद तुम्हे यह कर देगा , नशे की यहीं परिभाषा हैं।"


Dr.Nitu  Soni

I am a Ph.D. in Sanskrit and passionate about writing. I have more than 11 years of experience in literature research and writing. Motivational writing, speaking, finding new stories are my main interest. I am also good at teaching and at social outreach.

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