X

पेड़ बुढा ही सही आँगन में लगा रहने दो, फल न सही, जीवन भर छांव तो जरुर देंगा।

384 views Save

वृद्धावस्था एक पहाड़ पर चढ़ने की तरह है, आप ऊँचे से नीचे की ओर चढ़ते हैं, जितनी ऊंचाई परआप होते है, आप उतने ही अधिक प्रयत्नशील और प्रेरक होते जाएगें।


1. बुढ़ापा युवावस्था नहीं बल्कि अवसर और ताकत का एक नया चरण है। यह पूरे जीवन का एक रिकॉर्ड है-बेट्टी फ़्रिडन

सम्पूर्ण जीवन जीने के बाद की क्रियाशील, श्रेष्ठ, शान्त एवं चरम अवस्था जो की आत्म संतोष की अवस्था में परिणित हो जाती हैं, वृद्धावस्था हैं। मानव जीवन उम्र औसत काल के समीप या उससे अधिक हो अथवा 65 वर्ष की आयु के बाद की अवस्था। जीवन में कुछ और बेहतर करने और कार्य को पूर्ण करने की अवस्था। यह चिन्ता व्यक्ति की आत्म भावना को कभी वृद्ध नहीं होने देती हैं।

"बुजुर्ग लोग पौधों की तरह होते हैं। जब हम छोटे होते हैं, तो हमारे पास वह चेहरा और आकृति होती है जो भगवान ने हमें दी है। हमने अपनी अच्छी कमाई के लिए कुछ नहीं किया। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, चरित्र हमारे चेहरे पर ढलता जाता है। एक पवित्र स्थान पर एक सफेद मोमबत्ती की तरह, इसलिए यह वृद्धावस्था चेहरे की सुंदरता है। वृद्धावस्था की फसल पहले से सुरक्षित किए गए आशीर्वाद की प्रचुरता और प्रचुरता है। - जेम्स सिम्पसन"

2. वृद्धावस्था में साल नहीं, अपनी उम्र गिनो। आँसू नहीं मुस्कान द्वारा अपने जीवन को जीएँ। - जॉन लेनन

संस्कारित युवा वृद्ध में अपना भविष्य देखते हैं। क्योंकि युवा जिस उम्र में खड़े है वह उम्र वृद्ध, जी चुके होते है, इसलिए वे युवा से ज्यादा अनुभवशील होगें। परन्तु असंस्कारित युवा यह स्वीकार नहीं करता हे तो ऐसे में युवा का ही भविष्य अंधकारमय होता हैं। मध्यम, निम्न वर्गीय परिवार की तुलना में उच्च धनीक वर्गीय लोग पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव की वजह से वृद्ध अभिभावकों के साथ कुछ पल भी बिताना उचित नहीं समझते है, इसी का परिणाम हे कि देश में ओल्ड एज होम्स में सेवानिवृत्ति (रिटायरमेन्ट) के बाद जीवन बिताने वालों की संख्या सर्वाधिक हैं

3. हम बड़े नहीं होते हैं, हम बड़े हो जाते हैं, समय और परिस्थति के साथ। - पाब्लो पिकासो

यदि संतान सामान्य सक्षम होगी या असक्षम, ऐसी स्थिति में वृद्ध अपनी आय से परिवार का खर्चा चला रहा है तो उस समय वृद्ध व्यक्ति संतान पर हावी हो जाएगा, यह सब आपसी सोच पर निर्भर होता हैं। कभी कभी यह अहम् परिवार में बहुत ज्यादा होने पर आपसी कलह में परिणीत हो जाता हैं। ऐसी स्थिति में आपसी भावनाओं से आहत होने के कारण भावी पीढ़ी वृद्धों को वृद्धाश्रमों के हवाले छोड़ना सही समझती है तो वहीं दुसरी तरफ वृद्ध परनिर्भर से बचकर स्वाभिमान की वजह से वृद्धाश्रम में शरण लेना ज्यादा श्रेयस्कर समझते हैं। कुछ बुजुर्ग तो ऐसे भी है जिन्हें इन्हीं के परिवार के बच्चें परेशान होकर घरों में केद कर देते है

4. आयु कोई बाधा नहीं है। यह एक सीमा है जिसे आप अपने दिमाग में रखते हैं। -जैकी जोनर-केर्सी

यद्यपि इन बुजुर्गो के संरक्षण के लिए कानून भी बने हे,परन्तु जानकारी के अभाव में बदनामी के डर से बुजुर्ग कानुन का सहारा लेने से भी हिचकिचाते है। कई मामलों में तो बुजुर्ग अपने बच्चों से स्नेह के कारण इनके द्वारा दी गई प्रताडना को भी खामोशी से सह लेते हैं। जहाँ एक युवा अपना सहारा एक युवा के रूप में देखना ज्यादा श्रेष्ठ समझता है वहीं बुजुर्ग अपना सहारा युवा में देखना ज्यादा श्रेष्ठ समझता हैं। परन्तु वहीं संतान अपने अभिभावक की एक छोटी सी इच्छा की पूर्ति करने में असमर्थता बताती हैं।

5. झुर्रियों से बस ये संकेत मिलना चाहिए की मुस्कुराहटें कहाँ कहाँ पर थीं -मार्क ट्वेन

उम्र बिता दिया हमने बच्चों का फिक्र करने में,

बच्चे अब व्यस्त है हमारे कमियों का जिक्र करने में

बुजुर्गो के संरक्षण के सम्बन्ध में अनेक कानुनों का निर्माण होने के बाद भी यह घटना घटित हुई केरल की मेथ्स टीचर के साथ। जिस टीचर ने अपने जीवन का अधिकांश समय विद्यार्थियों के भविष्य को बनाने में लगा दिया, वृद्धावस्था में गुरू शिष्या परम्परा का समुचित  निर्वाह इसी टीचर की शिष्या के द्वारा प्रस्तुत किया गया। उसी टीचर का भविष्य और वर्तमान आज प्रश्नवाचक चिन्ह में परिणीत हो गया हैं। टीचर के द्वारा प्रदान की गई शिक्षा का प्रभाव था जिसने गुरू शिष्य परम्परा की सार्थकता को सम्बल प्रदान किया है, वहीं टीचर के परिवार पर एक आक्षेपीत चिन्ह प्रस्तुत करता हैं।

जिंदगी छोटी है और हमें इसके हर पल का सम्मान करना चाहिए। - ओरहन पामुक