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धूं धूं कर वो रावण जल गया

धूं धूं कर वो रावण जल गया

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धूं धूं कर वो रावण जल गया 

जश्न मनाओ धूं धूं कर वो रावण पुतला जल गया

पर जरा ठिठक कर सोचो !!!! क्या आज की वैदेही को न्याय मिल गया

 

वो तो अपने सपने बनाने घर से निकली थी

हिम्मत से लड़ी वो जितनी चुनौतियाँ उसे मिली थी

उसने तो बस पंख फैला आसमान में उड़ने की ख्वाहिश मांगी थी

और इस निष्ठुर समाज ने कह दिया !!!!! तूने लक्ष्मण रेखा लाँघि थी

उसके सपनों का वो महल चूर-चूर हो मिटटी में मिल गया

पर तुम जश्न मनाओ !!!! कम से कम वो पुतला धूं धूं कर जल गया

 

सोचा था उसने !!!! अँधेरा है पर क्यों डरूँ मैं

ये मेरे अपने ही है !!!! तो निर्भय हो क्यों न चलूँ मैं 

क्या हम पर उसका भरोसा उसकी कमजोरी था

आँखों में पैदा हुआ जो डर !!! क्या वो जरुरी था

उसके भरोसे का आज फिर क़त्ल हो गया 

पर तुम जश्न मनाओ !!!! कम से कम वो पुतला धूं धूं कर जल गया

 

खुश थी वो मैं दुनियां में आउंगी

किसी को बाबा !! किसी को आई !! किसी को भाई बुलाऊंगी

उसे तो बस खुल कर साँस लेने का इंतज़ार था

पगली सोच रही थी !! बाहर उसे गोद में लेने को कोई बेक़रार था

उसे न समझा !!! उसके अपनों ने ये क्या किआ

सांसे शुरू होने से पहले ही !!!! उसकी सांसों को क्यों घोट दिआ

जाते जाते उस मासूम को दुनियां का परिचय मिल गया

पर तुम जश्न मनाओ !!!! कम से कम वो पुतला धूं धूं कर जल गया

 

अरे ओ !!! मूर्खों समय है अभी जाग जाओ

शक्ति है वो !! उसकी गरिमा को यूँ न लजाओ

वो न होगी !!!! तो फिर कौन होगा 

संसार में मचेगा प्रलय !!! फिर वो योगेश्वर भी मौन होगा

देखों सामने जिसने उसे छुआ था आज भी जल रहा है

त्रेता के पाप का फल काली तक उसे मिल रहा है

करो कुछ ऐसा जब वैदेही कहे !!! हां समाज अब थोड़ा बदल गया

फिर तुम जश्न मनाओ !!!! तुम्हारे अंदर का रावण धूं धूं कर जल गया 


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Tushar Dubey

एक आवाज़ हूँ!!!!!!! तुम्हे जगाने आया हूँ

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