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जो बीत गई सो बात गई...!!

जो बीत गई सो बात गई...!!

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हमें अपने चित्त को अतीत की छाया से मुक्त करना होगा। किसी विचारक ने सच कहा है कि नदी में भी हम दोबारा उस पानी को छू नहीं सकते क्योंकि पहली बार जब पैर डाला तो वह जल धारा बह गई, उसी तरह जीवन धारा भी पल पल बह रही है। किसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होती। क्षण अनुक्षण जीवन बह रहा है। यहीं विचारों की अभिव्यक्ति कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता में भी प्रकट होती है। कवि के अनुसार...!!

जीवन में एक सितारा था

माना वह बेहद प्यारा था

वह डूब गया तो डूब गया

अम्बर के आनन को देखो

कितने इसके तारे टूटे

कितने इसके प्यारे छूटे

जो छूट गए फिर कहाँ मिले

पर बोलो टूटे तारों पर

कब अम्बर शोक मनाता है

जो बीत गई सो बात गई

जीवन में वह था एक कुसुम

थे उसपर नित्य निछावर तुम

वह सूख गया तो सूख गया

मधुवन की छाती को देखो

सूखी कितनी इसकी कलियाँ

मुरझायी कितनी वल्लरियाँ

जो मुरझायी फिर कहाँ खिली

पर बोलो सूखे फूलों पर

कब मधुवन शोर मचाता है

जो बीत गई सो बात गई

जीवन में मधु का प्याला था

तुमने तन मन दे डाला था

वह टूट गया तो टूट गया

मदिरालय का आँगन देखो

कितने प्याले हिल जाते हैं

गिर मिट्टी में मिल जाते हैं

जो गिरते हैं कब उठतें हैं

पर बोलो टूटे प्यालों पर

कब मदिरालय पछताता है

जो बीत गई सो बात गई

मृदु मिटटी के हैं बने हुए

मधु घट फूटा ही करते हैं

लघु जीवन लेकर आए हैं

प्याले टूटा ही करते हैं

फिर भी मदिरालय के अन्दर 

मधु के घट हैं मधु प्याले हैं

जो मादकता के मारे हैं

वे मधु लूटा ही करते हैं

वह कच्चा पीने वाला है

जिसकी ममता घट प्यालों पर

जो सच्चे मधु से जला हुआ

कब रोता है चिल्लाता है

जो बीत गई सो बात गई 

- हरिवंश राय बच्चन 

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सही शब्दों में समझा जाएं तो जब तक हम अतीत के सुख दुख से मुक्त नहीं होंगे तब तक हम वर्तमान जीवन के सही स्वरूप को स्वीकार कैसे कर पाएंगे। हमारा आज गुजरे हुए कल का ही परिणाम हैं, इसी तरह आने वाला कल बीत रहे वर्तमान का नया पड़ाव होगा। तभी तो हम अतीत को अपने सीने से लगाए नहीं रख सकते। अतीत का बोझ यदि हम सिर पर रखेंगे तो आज का आस्वादन कैसे कर पाएंगे। अतीत को भूलना अनिवार्य है,तभी तो नित्य प्रभात का समय हमारे जीवन में सुनहरे सवेरे के रूप में दस्तक देकर आएगा। आकाश के क्षितिज पर नई आभा देखने को मिलेंगी। चहचहाते पक्षियों का कलरव हमारे जीवन को संगीतमय बनाएगा। सब कुछ नया-नया होगा जैसे पहली बार जीवन में स्वपनील रंगों का अवतरण हुआ हो और ... और मन भी नए आयाम में, नई दिशाओं में प्रवेश करने लगा हों... ऐसा ही अनुभव हमारे मन में चरितार्थ होना प्रारंभ हो जाएगा...

इसलिए तो जो बीत गई सो बात गई...!!


Asha Soni

I am a science enthusiast and expert in science writing. I am also an expert in science teaching and communication. Innovation and new ideas are my favorite area. Nature thrills me and gives me more motivation to understand and think about science from a different perspective.

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