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मातृत्व, मदर्स डे' में नहीं समा सकता

मातृत्व, मदर्स डे' में नहीं समा सकता

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"एक मुद्दत से मेरी मां नहीं सोई 'ताबिश'

मैंने एक बार कहा था मुझे डर लगता है।"

अब्बास ताबिश

शरतचन्द्र ने लिखा है, "नारी की चरम सार्थकता मातृत्व में है। "एक बच्चे की प्रथम गुरु उसकी मां होती है। वह बच्चे के संस्कारों को निर्धारित करती है। बल्कि गर्भ में ही संस्कारित कर देती है, अभिमन्यु ने चक्रव्यूह को तोड़ना गर्भ में ही सीखा था। मां जन्म देती है, पोषण करती है, निर्माण करती है तथा उसके हित अहित का चिंतन करती है। मां ही है जो जीव को मानव में रुपांतरित करती है। बच्चे को जीने की कला सिखाती है। मां चाहे प्राचीन समय की हो या आज की आधुनिक समय की, उसकी ममता में कोई फर्क नहीं आया है। युग बदले पर मां नहीं बदली। उसके प्रेम, वात्सल्य, ममता, और करुणा की अविरल धारा निरंतर बहती आ रही है। एक मां अपना सर्वस्व बच्चों पर लुटा देती है। उसका त्याग और प्रेम सिर्फ एक दिन के 'मदर्स डे' में नहीं समा सकता।

किसी ने खूब लिखा है कि, "मरने के लिए तो बहुत से रास्ते हैं मगर जन्म लेने के लिए केवल मां। "मां नहीं होती तो हमारा अस्तित्व ही नहीं होता। एक बच्चे की हर छोटी बड़ी खुशी मां के लिए बहुत मायने रखती है। मां का स्थान कोई और नहीं ले सकता। मां का प्रेम निस्वार्थ होता है। हर व्यक्ति अपने मतलब से आपका साथ देता है या साथ छोड़ता है, लेकिन एक मां ही ऐसी है जो बिना किसी स्वार्थ के आजीवन अपने बच्चे का साथ निभाती है। एक बच्चे के लिए यह मायने नहीं रखता कि उसकी मां पढ़ी-लिखी है या अनपढ़ है। अमीर है या गरीब है। आधुनिक है या परंपरागत है। सुंदर है या साधारण, उसके लिए तो मां का होना ही अपने आप में पर्याप्त है। मां सिर्फ मां होती है। "मां अमीर या गरीब नहीं होती, बस दिल के करीब होती है। "मां चाहे अनपढ़ ही क्यों ना हो पर अपने बच्चे की पहली गुरु और उसकी मार्गदर्शक होती है। अंदर से चाहे मां टूटी हुई हो या डरी हुई हो लेकिन अपने बच्चे को हमेशा प्रोत्साहित करती है, उसे साहस देती है, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करना सिखाती है।

"उतरने ही नहीं देती मुझ पर कोई आफत,

मेरी मां की दुआओं ने आसमान रोक रखा है।" अज्ञात

मां, अम्मा, अम्मी, आई किसी भी नाम से पुकारो मां का एक ही धर्म है अपने अपने बच्चे की रक्षा करना। उसे हर मुसीबत से बचाना। उसके लिए दुआ करना। एक बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित जगह उसके मां की गोद होती है और एक औरत के जीवन का स्वर्णिम युग उसका मातृत्व होता है। मां वह है जो बच्चे के पैदा होने से पहले ही उसकी धड़कनों को अपनी कोख में सुन लेती है। जब उसके सामने कोई आकार नहीं होता, कोई शक्ल नहीं होती तो भी वह अपने बच्चे को कोख में महसूस करके उसके लिए फंदे बुनने लगती है। अपने बच्चों के सुख के लिए वह अपना सुख त्याग देती है। छोटी-छोटी बातों पर बच्चे मां से नाराज हो जाते हैं, गुस्सा हो जाते हैं पर मां नहीं होती। वह सिर्फ माफ़ करना जानती है, शिकायत करना तो उसे आता ही नहीं। "मैं थक गया शिकायत करते करते, पर मां नहीं थकी मेरे लिए दुआ मांगते।" 

आज के बदलते परिवेश में एक मां की चुनौतियां बढ़ गई है। आज मां सिर्फ घर और बच्चों को ही नहीं संभालती बल्कि नौकरी भी करती है। वह कामकाजी महिला भी है। आज उसका कार्य क्षेत्र बढ़ गया है वह पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। इस व्यस्त जीवन शैली में उसके पास समय का अभाव जरुर है परंतु उसकी ममता में कोई कमी नहीं आई है। एक कामकाजी मां होने के बाद भी वह अपने कर्तव्यों को भूली नहीं है अभी भी उसने अपने बच्चें का हाथ वैसे ही थाम रखा है। बदलते परिवेश और जीवन मूल्यों के अनुरूप वह अपने बच्चे को संस्कारित कर रही है। एक चट्टान की तरह अपने बच्चों के साथ मजबूती से खड़ी है। माना कि यह हर मां का फर्ज है और वह बड़ी शिद्दत से अपना फर्ज निभाती आ रही है पर बच्चों का भी मां के प्रति कुछ फर्ज है। जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, जीवन में आगे बढ़ जाते हैं तो मां अपने बच्चों की यादों के सहारे ही जीना सीख जाती है। यह सही है कि एक मां का कर्ज कोई नहीं चुका सकता लेकिन हम अपनी मां को थोड़ी खुशियां तो दे ही सकते हैं। ज्यादा कुछ नहीं चाहिए मां को बस कभी कभी उसकी खैरियत पूछ ले, उसका हाल चाल पूछले, कुछ पल उसके साथ बैठकर बिताए , इससे बड़ी दौलत एक मां के लिए और कुछ नहीं हो सकती। मां के लिए महंगे गिफ्ट से ज्यादा महत्व रखता है अपने बच्चों के साथ कुछ पल बिताना।

हैप्पी मदर्स डे

"जिस क्षण एक शिशु पैदा होता है, उसी क्षण एक मां का भी जन्म होता है। उसका अस्तित्व पहले से कभी विद्यमान नहीं होता। वह एक औरत अवश्य होती है, लेकिन मां, कभी नहीं। एक मां कुछ ऐसी है जो पूर्णतया नयी हैं।" -ओशो

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Dr. Rinku Sukhwal

M.A. (Political Science, Hindi), M.Ed., NET, Ph.D. (Education) Teaching Experience about 10 years (School & B.Ed. College) Writing is my hobby.

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