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 अब तो कदम उठा अरी चिरइया.. सोन चिरइया...!!

अब तो कदम उठा अरी चिरइया.. सोन चिरइया...!!

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वर्तमान में नारी ने रुढ़िवादी बेड़ियों को तोड़ना शुरू कर दिया है,यह एक सुखद संकेत है।“नारी जब अपने ऊपर थोपी हुई बेड़ियों एवं कड़ियों को तोड़ने लगेगी, तो विश्व की कोई शक्ति उसे नहीं रोक पाएगी।” 

सोन चिरइया उस लड़की के लिए सम्बोधन है जो संघर्षमय जीवन से पल्लवीत होकर एक विकसित नारी के रूप में जाग्रत और सक्रीय हो चुकी है। नवीन विकास के साथ महिलाओं में उस नवीन शक्ति का प्रवाह होना प्रारंभ हुआ है, जिससे वो अपने जीवन के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका में नजर आ सकती है।

सोन चिरइया, ओरी चिरइया, मोरी चिरइया..!!

मोरे अंगना में आयी रे चिरइया,

सोन चिरइया, हां री चिरइया...

बाबा की लाड़ो प्यारी चिरइया,

अम्मा की बगिया में महकी हे कलियां

ओरी चिरइया, सोन चिरइया, मोरी चिरइया..!!


पेड़ों की झुरमुट घुमे गौरैया,

ओरी चिरइया नन्ही गौरेया,

खेलत चिरइया, उड़ती,फिरती

हंसती, गाती, नाच नचावें

ओरी चिरइया, मोरी चिरइया, सोन चिरइया..!!


जिने का वह अधिकार लिए है,

शायद यह सब सहारा लिए रे

डुबतें को फिर किनारा लिए रे

मत मारों, मत मारों...जन्म से ही पहले चिरइया..

बाबा की लाड़ो प्यारी चिरइया..

मोरी चिरइया...सोन चिरइया...!!


मीठी सी एक मुस्कान है चिरइया

हमरे घर की पहचान रे चिरइया,

पर सच भी है मेहमान हे चिरइया,

जिस घर से अनजान हे चिरइया,

मत तोलों, मत तोलों पैइसा में चिरइया

पैइसा से भी अनमोल है, हे री चिरइया,

दहेज की वेदी पर न चढ़ाओं चिरइया

आग की लपटों में न जलाओं चिरइया

बाबा की लाड़ो प्यारी चिरइया..

मोरी चिरइया...सोन चिरइया...!!


सपने बोझील न बना ऐ चिरइया

अपने पंख पसार रे चिरइया

पंख फैलाकर उड़ रे चिरइया,

अडिग रहींअपने पथ पर चिरइया,

अनन्त मंजिल पहूंची है चिरइया,

बाबा की लाड़ो प्यारी चिरइया..

मोरी चिरइया...सोन चिरइया...!!


रोशन जहां में आये रे सवेरा

तोड़ कर पिंजरा उड़ जा चिरइया

आकाश में बाहें फैलाएं है चिरइया

नीलगगन मैं उड़ रहीं चिरैया

सबको राह दिखा रहीं चिरइया,

अंधेरे से आगे बढत चिरइया

फिर से लड़ूंगी कुछ तो बनुगीं

दुनिया को सीख सिखाइरे चिरइया

छा गयी चिरइया, अरे चिरइया

वाह री चिरइया, हां री चिरइया

सोन चिरइया, मोरी चिरइया..!!


सब्र की मिशाल हे री चिरइया

ममता की मूरत हे री चिरइया

रिश्तों की मिशाल हे री चिरइया

तक़दीर को बदलती हे री चिरइया,

सृष्टि का आधार हे री चिरइया

शक्ति का अवतार हे री चिरइया

श्री की वृद्धि हे री चिरइया

संस्कारों की धरोहर मोरी चिरइया

बाबा की लाड़ो प्यारी चिरइया

मोरी चिरइया...सोन चिरइया...!!


आंचल में सांस ले रही चिरइया

ममता की छांव से हट रे चिरइया

जीवन की लड़ाई लड रे चिरइया

खुद को साबित कर रे चिरइया

अब तो कदम उठा अरी चिरइया,

बोल चुके थे जो कुछ कहना हे,

सुन ले दुनिया हे री चिरइया..!!


बाबा की लाड़ो प्यारी चिरइया

मोरी चिरइया...सोन चिरइया..!!

ओरी चिरइया, सोन चिरइया,सोन चिरइया...!!


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“नारी जब अपने ऊपर थोपी हुई बेड़ियों एवं कड़ियों को तोड़ने लगेगी, तो विश्व की कोई शक्ति उसे नहीं रोक पाएगी”


Asha Soni

I am a science enthusiast and expert in science writing. I am also an expert in science teaching and communication. Innovation and new ideas are my favorite area. Nature thrills me and gives me more motivation to understand and think about science from a different perspective.

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