X
अदमनीय साहस एवं जीवट की कहानी | प्रमोदिनी राउल के जीवन और मौत के बीच के संघर्ष में जीवन की जीत हुई

अदमनीय साहस एवं जीवट की कहानी | प्रमोदिनी राउल के जीवन और मौत के बीच के संघर्ष में जीवन की जीत हुई

552 views Save
"हौसलों की आंधियां इतनी तेज होनी चाहिए कि किस्मत का सिक्का पुरी तरह से पलट जाएं।"

यह कहानी है ओडिशा के जगतसिंहपुर की प्रमोदिनी राउल की। प्रमोदिनी राउल जिनके जीवन और मौत के बीच के संघर्ष में जीवन की जीत हुई, एकबार तो इस जीत के संघर्ष के जश्न में मौत भी प्रमोदिनी को सलाम देने के लिए मानों ठहर सी गई थीं।

सूकुन यह वहीं है न जो बचपन में हुआ करता था, हालत-ए जिंदगी सिखा देती है समझदारी वरना बचपन किसे पसंद नहीं हैं।

प्रमोदिनी राउल का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, साधारण मध्यम वर्गीय परिवार में पली बढ़ी प्रमोदिनी, पिताजी की बचपन में ही विद्युत में शार्ट सर्किट होने से मृत्यु हो गई थी, भाई नहीं था, परिवार कि भरण पोषण की सारी जिम्मेदारी रिश्तेदारो पर आश्रित, बालपन से ही प्रमोदिनी का गरीबी से संघर्ष शुरू हो चुका था। उन हालतों ने भी प्रमोदिनी को कुछ इस तरह से ढाल रखा था की वह अपना गुस्सा भी व्यक्त नहीं कर पातीं थी, ज्यादा गुस्सा उसकी आंखों में से आंसू बहकर निकलने लग जाता था। ऐसा कोई जिम्मेदार व्यक्ति भी प्रमोदिनी के परिवार में नहीं था, जो प्रारम्भिक जीवन की अवस्था में उसके परिवार को सम्बल प्रदान कर सके। संघर्ष पूर्ण जीवन व्यतीत करते हुए प्रमोदिनी ने अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए कालेज में प्रवेश लिया। प्रमोदिनी बचपन में ही समय से पूर्व समझदार हो गई थी।

हर कोई जीतना चाहता है लेकिन जो हारकर भी जीतना चाहते है वहीं एकदिन जरुर जीतते है।

14-15 साल की प्रमोदिनी किशोरी की तरह मासुमियत से अपने सपनों की दुनिया में जी रही थी की अचानक एक घटना ने उनके जीवन को बर्बाद करके रख दिया। उस समय वह केवल 17 साल की थीं,प्रमोदिनी राउल पर कुछ साल पहले एसिड अटैक हुआ था, जिसके बाद उन्होंने जीवन के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। जब उन पर तेजाब से हमला किया गया था, उनके शरीर का 80 फीसदी हिस्सा जल चुका था और इस हमले ने उनकी दोनों आंखें छीन ली थीं। और वह पूरी तरह से अंधी हो चुकी थीं। आर्मी के जवान के द्वारा उस पर सोलह साल की उम्र में एसिड अटेक किया था, जिसमें प्रमोदिनी का चेहरा बुरी तरह से झुलस चुका था। पांच साल तक इस लड़की ने लगातार अस्पताल के चक्कर लगाएं, एक तरफ गरीबी का संघर्ष था तो दूसरी ओर जीवन और मौत से लड़ाई जारी थीं। प्रमोदिनी हार कहां मानने वाली थी। प्रमोदिनी की गलती न होने पर भी इस गलती का खामियाजा जबरन उसे पुरी जिंदगी भुगतना पड़ेगा,कारण सिर्फ इतना था कि उसने आर्मी के शराबी व्यक्ति से शादी करने से साफ इंकार कर दिया।

कितनी अजीब बात है न, आपकी जेब में जब पैसे हो तो दुनिया आपकी औकात देखती है। और जब आपकी जेब में पैसे ना हो तब दुनिया अपनी “औकात दिखाती” है।

एसिड अटेक होने के बाद इसी समाज के द्वारा प्रमोदनी के चरित्र पर जहां बुरी तरह से संदेह किया गया और प्रश्न वाचक चिन्हों से आक्षेपों के कटघरों में खड़ा कर दिया गया। वहीं सभी रिश्तेदारों ने उसके हालातों से मूंह मोड़ लिया। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि प्रमोदिनी की ही ग़लती होंगी, इसने विरोध नहीं किया, और कुछ ने तो यह भी कह दिया की प्रमोदिनी ज्यादा अच्छा रहता कि तुम इसी आदमी से शादी कर लेती, कुछ इसी समाज के घनिष्ठ रिश्तेदारों ने तो यहां तक कह दिया कि इस लड़की का जीवन भर कब तक ध्यान रख पाओगें, क्यों न इसे जहर का इंजेक्शन देकर ही मार दे। यहां पर भी प्रमोदिनी अपने जीवन से हार कहां मानने वाली थी, वह एसिड अटैक होने के बाद भी कई सर्जरियां करवाने के बाद भी लगभग पांच साल तक बिस्तर पर लेटे लेटे मौत से संघर्ष करते हुए,आज जीवन की लड़ाई जीत चुकी है। प्रमोदिनी की जीवन की लड़ाई उन लोगों के लिए भी मशाल है जो परिस्थितियों से हारकर, अपनी जीवनलीला समाप्त कर देते हैं, और उन लोगों के लिए भी नींव का पत्थर कायम करतीं हैं, जो जीवन में होने वाली अकस्मात घटनाओं से घबराकर अपना मानसिक संतुलन खो देते हैं। प्रमोदिनी लड़ी और जब तक लडी जब तक वह मौत से नहीं जीत पायी, वह उस भयावह स्थिति से भी लड़ी जब तक कि उसने  उस एसिड अटैक से हमला करने वाले आर्मी मेन को सज़ा नहीं दिला दी।

प्रमोदिनी राउल 2009 में हुआ था एसिड अटैक

प्रमोदिनी ने कहा कि 18 अप्रैल 2009 को मुझ पर तेजाब फेंका गया था। उस समय सेना के जवान के तौर पर कार्यरत संतोष वेदांत ने शादी का प्रस्ताव रखा था लेकिन प्रमोदिनी ने मना कर दिया, जिसके बाद संतोष ने उसके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया। उस समय प्रमोदिनी अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही थीं। प्रमोदिनी के कॉलेज के पास एक आर्मी कैंप था, जहां संतोष ने प्रमोदिनी को देखा था और शादी का प्रस्ताव रखा था। उस समय प्रमोदिनी की उम्र बहुत ही कम थी और वो आगे पढ़ना चाहती थी, इसलिए घरवालों ने शादी के लिए मना कर दिया। इसके बाद भी संतोष प्रमोदिनी का पीछा करता रहा और 2009 में संतोष ने प्रमोदिनी पर तेजाब फेंक दिया। प्रमोदिनी 17 साल की थीं, जब उन पर तेजाब से हमला किया गया था, उनके शरीर का 80 फीसदी हिस्सा जल चुका था और इस हमले ने उनकी दोनों आंखें छीन ली थीं।