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युवाओं के प्रेरणापुंज : स्वामी विवेकानंद (युवा दिवस विशेष)

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"युवा वह है, जो बुराइयों से लड़ता है, दुर्गुणों से दूर रहता है और जिसमें होश और जोश दोनों हो।"-स्वामी विवेकानंद

 

12 जनवरी देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज ही के दिन आधुनिक भारत के निर्माता स्वामी विवेकानंद जी का जन्म हुआ था। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि देश के युवा वर्ग को विवेकानंद जी के आदर्शों और विचारों से अवगत करवाया जा सके। उन को प्रोत्साहित किया जा सके, जिससे कि युवकों की सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का प्रयोग राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय विकास में हो सके। उनके शब्दों में, "मेरी आशा और विश्वास नवयुवकों पर है।" विवेकानंद जी केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व की महान विभूतियों में गिने जाते हैं।

भारतीय इतिहास में स्वामी जी एक ध्रुव तारे के रूप में आज भी जगमग आ रहे हैं। उन्होंने वेदों की आधुनिक संदर्भ में व्याख्या की तथा भारत की महान सांस्कृतिक विरासत से समूचे विश्व को परिचित करवाया। उनका जीवन दर्शन अत्यंत गौरवपूर्ण एवं प्रेरणादायक है। उन्होंने केवल सैद्धांतिक उपदेश ही नहीं दिया बल्कि क्रियात्मक रूप से भी यह सिद्ध किया कि यदि प्राचीन वेदांत की व्यवस्था करके उसे वर्तमान जीवन से संबंधित किया जाए तो भारत की प्रत्येक समस्या आसानी से सुलझ सकती है। उन्होंने पाश्चात्य देशों में भावात्मक तथा भारत में क्रियात्मक वेदांत का प्रचार किया।

स्वामी जी का दर्शन, चिंतन, विचार, उनके आदर्श युवाओं के लिए प्रेरणा का बहुत बड़ा स्त्रोत है, प्रेरणापुंज है। जीवन में नवीन ऊर्जा का संचार करते हैं। उनके विचारों को अपनाकर आज के युवा जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उनके विचार एक निराश व्यक्ति के मन में भी जीवन जीने का साहस पैदा कर देते हैं। उनके उपदेश मनुष्य के जीवन को प्रकाशमय एवं प्रेरित करते हैं। स्वामी जी कर्मवादी थे। वह कर्म करने पर विश्वास करते थे। उनका मानना था कि जो भाग्य के भरोसे बैठे रहते हैं, वह कायर होते हैं, जो कर्म करते हैं वही जीवन में सफल होते हैं। आगे बढते हैं।

उनके शब्दों में "खड़े होकर अपने भाग्य का निर्माण करो।" भीरु, मलिन तथा उदासीन व्यक्ति अपने जीवन में किसी कार्य को नहीं कर सकता। पृथ्वी का उद्धार केवल बहादुर योद्धा ही कर सकते हैं। अतः उन्होंने भारतीय युवाओं को वीर, कर्मठ तथा निर्भय बनने का सुझाव दिया। भय का जीवन में कोई स्थान नहीं है। उनके दर्शन का सार है -अभय होकर संघर्ष के द्वारा मानवता की सेवा करना। उनके शब्दों में , "शक्ति जीवन है, निर्बलता​ मृत्यु है। विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु है। प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु है।"

स्वामी जी का मानना था कि जीवन एक संघर्ष है, इसमें निरंतर चुनौतियां आती रहती है और इस संघर्ष में केवल समर्थ की विजय होती है और असमर्थ का विनाश हो जाता है। इसलिए विजय प्राप्त करने अर्थात सफलता पाने के लिए और जीवित रहने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करना चाहिए। संघर्ष करना चाहिए। स्वामी जी के शब्दों में जीवन में कभी निराश ना हो, असफलता से कभी घबराए नहीं बल्कि तब तक प्रयास करते रहे जब तक कि सफलता प्राप्त नहीं हो जाती। संघर्षों​ का डटकर मुकाबला करें।यदि हम जीतते हैं तो अच्छी बात है, हम दूसरों का नेतृत्व करेंगेे और यदि हार जाते हैं,तो दूसरों का मार्गदर्शन​ करेंगे।

उनके शब्दों में "किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या ना आए आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।" आज के युवा जल्दी सफलता प्राप्त करना चाहते हैं। कई बार युवा अपनी असफलताओं को स्वीकार नहीं कर पाते और अनुचित कदम उठा लेते हैं ऐसे में स्वामी जी के विचार उनको मनोबल प्रदान करते हैं। स्वामी जी का मानना था कि अपने आप को कभी भी कमजोर नहीं समझें अपना आत्मविश्वास हमेशा बनाए रखें। अपने ऊपर विश्वास करें। यह कभी नहीं कहें कि "मैं नहीं कर सकता" क्योंकि आप अनंत हैं आप कुछ भी कर सकते​ हैं।

उनके शब्दों में "जो तुम सोचते हो वह हो जाओगे ,यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो तुम कमजोर हो जाओगे अगर खुद को ताकतवर सोचते हो तुम ताकतवर हो जाओगे।" इसलिए युवाओं को उनका यही संदेश था कि अपने में आत्मविश्वास, आत्मबल तथा स्वावलंबन उत्पन्न करें। कभी खुद को कमजोर ना समझे, क्योंकि "खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।" जो कुछ तुम को शारीरिक बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से कमजोर बनाता है उसे अपने जीवन से निकाल दो।

उन्होंने केवल सिद्धांतों पर बल देने के स्थान पर व्यवहारिकता को जीवन में अपनाने पर बल दिया। यहां तक कि उन्होंने केवल​ पुस्तकीय ज्ञान को भी व्यर्थ बताया है। सैद्धांतिक शिक्षा का खंडन करते हुए उन्होंने व्यावहारिक शिक्षा पर बल दिया। उनका कहना था कि "हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जिसके द्वारा चरित्र का निर्माण होता है, मस्तिष्क की शक्ति में वृद्धि होती है, बुद्धि विकसित होती है तथा जिसको प्राप्त करके व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।" उन्होंने युवाओं को सचेत करते हुए कहा- "तुमको कार्य के प्रत्येक क्षेत्र को व्यवहारिक बनाना पड़ेगा। संपूर्ण देश का सिद्धांतों के ढेरों ने विनाश कर दिया है।"

युवाओं को उनका यही संदेश था "उठो ! जागो और उस समय तक बढ़ते रहो जब तक कि चरम उद्देश्य की प्राप्ति न हो जाएं।" स्वामी जी के विचार, उनका चिंतन आज भी प्रासंगिक हैं, जिसका अनुकरण कर के युवाओं की बहुत सी समस्याओं का समाधान हो सकता है तथा वह सफलता की ओर अग्रसर हो सकेंगे और अपने जीवन को अर्थपूर्ण बना सकेंगें। उनका मानना था कि किसी भी देश की उन्नति सबसे अधिक उस देश की युवा पीढ़ी के कंधों पर होती है। वास्तव में युवा दिवस मनाने की सार्थकता तभी है जब देश के युवा उनके विचारों को आत्मसात करें और​ जीवन में उनका सदुपयोग करें। युवाओं को प्रेरित करने के लिए स्वामी जी के विचारों से अधिक प्रेरणादायक कुछ हो ही नहीं सकता। 

"मेरा विश्वास युवा पीढ़ी में हैं, आधुनिक पीढ़ी से मेरे कार्यकर्ता आ जाएंगे।"- स्वामी विवेकानंद

राष्ट्रीय युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार हैं।-स्वामी विवेकानंद


Dr. Rinku Sukhwal

M.A. (Political Science, Hindi), M.Ed., NET, Ph.D. (Education) Teaching Experience about 10 years (School & B.Ed. College) Writing is my hobby.

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