X
शुक्रिया ऐं ज़िन्दगी...!

शुक्रिया ऐं ज़िन्दगी...!

241 views Save

शुक्रिया ऐं ज़िन्दगी !

जीने का हुनर सिखा दिया..!!

मुझे जिंदगी का, इतना तजुर्बा तो नहीं है..!

पर सुना है सादगी ने, जीना आसान कर दिया है।

शुक्रिया ऐं ज़िन्दगी...!!

टी.वी. स्क्रीन या मैगजीन के कवर पेज पर नजर आ रही सुंदरता असली सुंदरता नहीं है। सच्ची सुंदरता का मतलब वह सुंदरता जो मन आत्मा को सुकून देवें, खुद के लिए भी अच्छी भावना और वहीं भावना जो दूसरों के लिए भी जो आपके आसपास मौजूद हों। एक सुंदरता वह नहीं है जो बाहर से दिखती है, असली सुंदरता तो वह हैं जो आपके स्वयं के अन्तर्मन में होती है।

अभी भी आप के आसपास जो सुंदरता बची है उसके बारे में सोचिये और खुश रहिये..!!

हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां सुंदरता को रंग से, शिक्षा को मार्क्स से, और सम्मान को पैसों से देखा जाता है, जो बिल्कुल भी सहीं नहीं है। हमारे सांवले रंग, मोटा शरीर , चेहरे की सुंदरता का न होना, अथवा शरीर में कुछ विकृति हमारी खुबसूरती और सफलता का निर्धारण नहीं कर सकते हैं। बचपन से हमारा किया गया पालन पोषण, फिजिकल फिटनेस ही आकर्षक व्यक्तित्व का निर्धारण कर सकता है। यदि आप सचमुच में खुबसूरत दिखना चाहतें हों तो खुद को दूसरों की नजरों के अनुसार देखना बंद करें।

''जीवन में खूबसूरत दिखना ही काफी नही है, मन से खूबसूरत होना पड़ता है, चेहरे की खूबसूरती आज नही तो कल ढल जायगी, लेकिन मन की खूबसूरती हमेशा साथ रहेगी।

अधिकांशतः हमारे द्वारा ही हमारे परिवार में ही अधिकतर कहते हुए सुना है कि ज्यादा खाओगें तो मोटे हो जाओगे, अरे..तुम इतने दुबले कैसे हो, इस शरीर को लेकर आगे क्या कर पाओगे, अपना चेहरा मोहरा लम्बाई तो देखो, इससे तो तुम एक चपरासी की नौकरी भी हासिल नहीं कर पाओगें, और बात करते हों अफसर की, अरे ज्यादा चाय मत पीआ करों, चाय पीने से रंग सांवला हों जाएगा, फिर तुम्हारी शादी कैसे होगी। यह सब तरह की बातें हमारे बाहरी आवरण का निर्धारण करतीं हैं।

खूबसूरती का कोई नाम नहीं होता ना इसकी जगह, वह तो महसुस कियी जाती है।

जो लोग आपके पद, प्रतिष्ठा सुंदरता और पैसे से जुड़े हैं,वो लोग केवल "सुख" में आपके साथ खड़े रहेंगे और जो लोग आपकी, विचार और व्यवहार से जुड़े है, वो लोग"संकट" में भी आपके लिये खड़े रहे। काला या गौरे रंग के आधार पर खुबसूरती का निर्धारण नहीं किया जा सकता है, इसमें अहम् भुमिका इसमें जुड़ी हुई भ्रान्तियो से हैं। अधिकांशतः हम लोग सफेद रंग को उच्च आकांशाओं और प्रगति का सुचक मानने लगते हैं, सफेद रंग सुंदरता का मापदंड नहीं हो सकता हैं। सात्त्विक भावनाएं ही हमें अंदर से सुंदर बनातीं हैं और इन संस्कारों के बि‍ना तो हमारी ऊपरी सुंदरता कि‍सी भी काम की नहीं है, संस्कारों की सुंदरता ही आपको भीड़ से अलग कर आपकी पहचान बनातीं है। यद्यपि सुंदरता ध्यान आकर्षित करती है परन्तु वह आपके वास्तविक व्यक्तित्व का मापदंड निर्धारित नहीं कर सकतीं हैं। यदि आप महिनों या हफ्तों तक लगातार ब्यूटी प्रोडक्ट्स उपयोग करने पर भी इतने सुन्दर नहीं दिखेंगे, उसके बदले उन्हीं ब्यूटी प्रोडक्ट्स के पैसों से किसी भूखे को भोजन कराएं और उसके बाद आप आइने के सामने खड़े हो जाएं,उस समय में आपके चेहरे की मुस्कुराहट आपकी खुबसूरती को स्वत: ही प्रकट करेंगी। यकीन मानिए उस समय दुनिया के सबसे खूबसूरत इंसान आप ही होगें।

आंतरिक सुन्दरता आत्मसुधार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए।-प्रिसिला

एक सुंदर आदमी बड़े करीने से कपड़े पहने और विशुद्ध रूप से सोचता है। उसके पास आत्मविश्वास और गरिमा दोनों है। एक सुंदर आदमी ईमानदारी से मुस्कुराता है और कभी कपटी नहीं होता है। वह अपनी आंतरिक दुनिया और बाहरी सुंदरता के साथ सामंजस्य रखता हैं। मानव संस्कृति भी अपनी सुंदरता को व्यक्त करती है। इसे बातचीत के तरीके, व्यवहार और रहने के सलीके और तहज़ीब आदि में व्यक्त किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति अशिष्ट रूप से कपड़े पहने हुए है, गलत व्यवहार और बेईमानी करता है, तो इससे पता चलता है कि वह अपने और अपने आसपास की दुनिया के साथ सामंजस्य नहीं रखता है।

चलो माना,दुनिया बहुत बुरी है,लेकिन तुम तो अच्छे बनो,तुम्हें किसने रोका है। जिदंगी मे अच्छे लोगो की तलाश मत करो,खुद अच्छे बन जाओ,आपसे मिलकर शायद किसी की तलाश पूरी हो ।

निस्संदेह, एक व्यक्ति अपने पूरे जीवन में सुंदर हो जाता है। वह कुछ नया सीखता है, अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सीखता है, समाज में व्यवहार करता है, बात करता है, सोचता है और बस जीवित रहता है। यदि किसी व्यक्ति को कुछ नया और सकारात्मक सीखनें की इच्छा है, तो वह निश्चित रूप से बाहर और अंदर दोनों में बेहतर हो जाएगा।

सुंदरता हो न हो, सादगी होनी चाहिए! सुंदरता आपके दिमाग में होनी चाहिए, ना के आपके आइने में।

“किसी के कहने सुनने से अथवा तारीफ़ करने से सुंदरता का निर्धारण नहीं किया जा सकता है। यदि आप सुंदर बनना चाहते हैं, तो आत्म-विस्मरण तक कड़ी मेहनत करें, एक निश्चित दिशा उचित मापदंड में सकारात्मक कार्य करें। काम करें ताकि आप अपने पसंदीदा व्यवसाय में एक निर्माता, और एक कुशल क्रियाशिल व्यक्ति की तरह महसूस करें। काम करें ताकि आपकी आँखें आध्यात्मिकता को बहुत खुशी के साथ व्यक्त करें - रचनात्मकता की खुशी के साथ।

जिंदगी में खुबसूरती और बदसुरती के आधार पर खोना या कुछ पाना, हमारे विकास क्रम का निर्धारण नहीं करता है। दो लाईन हमारे जीवन के विकास को पुनः सम्बल प्रदान करतीं हैं।

याद रखना ….

जो खोया उसका गम नहीं, लेकिन..जो पाया है वो किसी से कम नहीं…!!

जो नहीं है वो एक ख्वाब है, और..जो है वो भी लाजवाब है ...!!

इसलिए, शुक्रिया ऐं ज़िन्दगी ! जीने का हुनर सिखा दिया...!!

सुंदरता हो न हो, सादगी होनी चाहिए! सुंदरता आपके दिमाग में होनी चाहिए, ना के आपके आइने में।


Dr.Nitu  Soni

I am a Ph.D. in Sanskrit and passionate about writing. I have more than 11 years of experience in literature research and writing. Motivational writing, speaking, finding new stories are my main interest. I am also good at teaching and at social outreach.

241 views

Recent Articles