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वो आखरी बाज़ी

वो आखरी बाज़ी

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ये रण से पहले की वो कहानी थी

झुके थे वीरों के सर अपमानित हुई कुरुकुल की वो रानी थी

धर्मराज की पदवी पर असिन वो द्युत क्रीड़ा में लिप्त था

गांधार कुमार के पासों की माया में वो भी आज विक्षिप्त था

धन गया !!!! मान गया !!!! गया साम्राज्य वो हार

मुकुट रख चरणों में अपनी पराजय को उसने किआ स्वीकार

 

कुटिल मुस्कान लिए फिर सौबल ने अपने शब्दों का जाल फैलाया था

खेल जाओ एक और बाज़ी धर्मराज !!!! जीते तो वापस दूंगा वो सब जो तुमने गवाया था

माया आसक्त हो युधिष्ठिर एक-एक वीर दाव लगा रहा था

बन रहे थे दास कौंतेय !!!!! देखो कैसे वो अपना तेज गवा रहा था

 

पांचाली को समझ संपत्ति उसने अंतिम बार पासों को फेका था

हुआ जो परिणाम ऐसा कभी आर्यव्रत ने नहीं देखा था

उन्मत्त हो दुर्योधन ने फिर अपनी नीचता को प्रदर्शित किया

केशों से घसीट कर लाओ मेरी दासी !!!!! हुंकार भर यूँ उसने आदेशित किया

 

वीरों से भरी सभा में एक नारी का चिर हरा जा रहा था

नपुंसक बन बैठे थे सब !!!! कुलवधू को यूँ नग्न करा जा रहा था

दातों से वस्त्र पकड़े अपनी अस्मिता के लिए वो लड़ रही थी

चरों दिशाएं हुई कम्पित !!!! पर रुदाली उन वीरों के कानों में नहीं पढ़ रही थी

अंत में योगेश्वर ने अपना ऋण चुकाया था

लाज बचाने नारी की मधुसूदन द्वारका से चला आया था 

 

अबला स्वरुप त्याग !!! अब याज्ञसेनी ने उग्र रूप धर लिया

सर्वनाश का प्रयाय बनूँगी मैं !!!! कुरुकुल के अंत का उसने ये प्रण किया

कुरु-सभा में बचा है कोई वीर तो उसे मैं ललकारती हूँ

सर झुका बैठे हो सब !!!!! तुम्हारे बल को मैं धिक्कारती हूँ

कुरुसभा से उठी चिंगारी ने कुरुक्षेत्र में भीषण रूप धरा था

चौसर से शुरू हुआ था जो खेल महाभारत का संग्राम वो बना था

इतिहास गवाह है की पुरुष प्रधान समाज में महिलाओ को अपने जन्मसिद्ध अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता हैं। द्रोपदी का चीरहरण इस बात का धोतक है, की कैसे पुरुषो ने उनके अस्तित्व को वस्तु मात्र समज कर दांव पैर लगा दिया था। आज के समाज में भी यह बात काफी हद तक सच साबित होती दिखती हैं। महाभारत काल की इस घटना को देखते हुए यह साबित होता है की यह लड़ाई हज़ारो वर्षो से चली आ रही है । और आज के बदलते समय को देखते हुए हमें एक सामान अधिकारों वाले समाज का निर्माण करना होगा। जहाँ किसी भी व्यक्ति विशेष या वर्ग के अधिकारों का हनन न होये एवं सामान अवसर प्रदान करे जाये।


Tushar Dubey

एक आवाज़ हूँ!!!!!!! तुम्हे जगाने आया हूँ

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