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संक्रांति का पुण्य | जीवन अनुभव

संक्रांति का पुण्य | जीवन अनुभव

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"एक व्यक्ति का मन इस बात में होता है कि वह क्या दे सकता है, इसमें नहीं की वह क्या पा सकता है।"
-ऐनी. फ्रैंक

आज पूरे देश में मकर संक्रांति का पर्व अलग-अलग रूप में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। गुड़ और तिल की खुशबू हर तरफ फैली है। इस दिन दान आदि देने का विशेष महत्व है। इसी से जुड़ी मेरे जीवन की एक घटना है। लगभग पंद्रह वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी मकर संक्रांति पर अनायास ही वह घटना याद आ जाती है। 

बात उन दिनों की है, जब मैं एक विद्यालय में पढ़ाती थी। दिसंबर का महीना था। सर्दी बढ़ने लगी थी, सो मैं रिक्से से विद्यालय जाने लगी। एक बहुत वृद्ध रिक्शे वाला सुबह-सुबह गली के मोड़ पर खड़ा रहता था। मैं रोज उसी के रिक्से में जाती थी। मैंने देखा उसके पास कुछ भी गर्म कपड़े नहीं थे। ठंड से ठिठुर रहा था। मेरे पिता जी के कुछ स्वेटर पड़े थे, जो वो काम में नहीं लेते थे। मैंने तय किया कि वे स्वेटर मैं उसे दे दूंगी। अगले दिन विद्यालय जाते समय उन कपड़ों को बैंग में भर रहीं थीं कि अचानक मन में ख्याल आया कि मकर संक्रांति आने वाली है, क्यों ना मैं इन्हें संक्रांति पर दूं। उस दिन दान करने से बहुत पुण्य मिलता है। यह सोचकर मैंने वह कपड़े वापस रख दिये और विद्यालय चली गई। चार पांच दिन बाद वह रिक्शे वाला नजर नहीं आया तो मैं दूसरा रिक्शा कर के जाने लगी। इसी तरह दिन बीतते गए। संक्रांति का दिन भी आ गया। मै गर्म कपड़े लेकर इस उम्मीद में गई कि आज तो वह वृद्ध रिक्शे वाला मिल जाएगा। परंतु वह आज भी नहीं दिखा। ना जाने क्यों मुझे चिंता होने लगी। अगले दिन मैंने आस पास के रिक्से वालों से उसके बारे में पूछताछ की। तब मुझे पता चला कि वह अब नहीं रहा। ठंड के कारण उसकी मृत्यु हो गई। मुझे अपनी सोच पर बहुत पछतावा हो रहा था। संक्रांति पर पुण्य के लालच में मैंने कितनी बड़ी गलती कर दी। काश मैंने उसी दिन वह गर्म कपड़े उसे दे दिए होते तो शायद वह बच सकता था।

आज भी यह घटना मुझे बेचैन कर देती है। इस घटना ने मुझे सिखाया कि सहायता, परोपकार, दान का कोई विशेष दिन नहीं होता। जिस दिन, जिस समय यह विचार हमारे मन में आता है वहीं सर्वोत्तम दिन है। विशेष पर्व, त्योहार के अलावा भी दान एवं सहायता की जा सकती है। जब लेने वाले को सबसे ज्यादा जरूरत हो, हमारी मदद की वो ही सबसे बड़ा धर्म है।                        

किसी अच्छे काम की शुरुआत के लिए कोई भी वक्त बुरा नहीं होता।



Dr. Rinku Sukhwal

M.A. (Political Science, Hindi), M.Ed., NET, Ph.D. (Education) Teaching Experience about 10 years (School & B.Ed. College) Writing is my hobby.

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