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वो लड़की नहीं वो जवाब है

वो लड़की नहीं वो जवाब है

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वो लड़की नहीं वो जवाब है,

हर उस तंज उस ताने का हिसाब है।  

जो लोगों ने लगाई थी बंदिशें यूहीं, 

कभी नजरों से, कभी शब्दों से, 

उन सभी से आजाद वो एक अंदाज है। 


उठ बैठी थी रातों में जो सपने चुनती आखों से, 

वो सुबह का सूरज देख रही थी सिर्फ खिड़कियों की सलाखों से।  

उसने भी चाहा था के शामें गुजरें चाय और ठहाकों में,

पर अपनी कसौटी पे खरा उतरने को कुर्बान किया सब मजाकों में।  


वो लड़की नहीं वो जवाब है,

हर उस तंज उस ताने का हिसाब है। 


जब चाची मासी रिश्ते लेकर घर की ओर चली आती थीं, 

वो झल्लाती, थोड़ा घबराती, खामोशियों के सायें में अपनी असहमति जताती थी।  

अपने नजरिये से दुनिया जब बाबा को दिखलाती थी, 

बाबा भी शायद घबराये की लड़की कहीं हाथ से तो ना निकली जाती थी।  

माँ को भी थोड़ी फ़िक्र लगी, पर वो फिर भी हर दम उसे समझाती थी, 

एक सपना देखा है माँ मैंने और फिर उन सपनो में खो जाती थी। 


वो लड़की नहीं वो जवाब है,

हर उस तंज उस ताने का हिसाब है। 


जब बाहर निकली वो घर से तो सवाल कई अनकहे बरसे, 

के लड़की है तू, ना निकल ऐसे, और काम ले जरा सबर से।  

पर इठलाती वो अपनी धुन में लड़ती रही है जग भर से , 

नहीं हारूंगी मैं, नहीं रुकूंगी मैं, के ज़ुनून है कुछ कर गुजरने का सर पे।  

माना के आज अकेली सी खफा हूँ इन रिवाजों से,

पर बदलूंगी समाज की सूरत एक दिन अपने इरादों से, अपने अल्फ़ाज़ों से।  


वो लड़की नहीं वो जवाब है,

हर उस तंज उस ताने का हिसाब है।  

जो लोगों ने लगाई थी बंदिशें यूहीं, 

कभी नजरों से, कभी शब्दों से, 

उन सभी से आजाद वो एक अंदाज है।


वो लड़की नहीं वो जवाब है,

हर उस तंज उस ताने का हिसाब है।  


This Poem is a tribute to every girl and their day to day struggle in society


Shubham Dwivedi

I am a Ph.D. in Pharmacology, working in the area of neuroscience. Have deep interest in writing Poems and stories. Please follow me for updates of my content.

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