X
 अपने भविष्य की भविष्यवाणी करने का सबसे अच्छा तरीका इसे बनाना है।

अपने भविष्य की भविष्यवाणी करने का सबसे अच्छा तरीका इसे बनाना है।

139 views Save

चरित्र एक पेड़ की तरह है और इसकी छाया प्रतिष्ठा है। छाया वह है जो हम सोचते हैं और पेड़ असली चीज है। -अब्राहम लिंकन

अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को अधिकांश लोग उनकी दयालुता, गरीबी से उठकर राष्ट्रपति बनने तक के संघर्ष और दास प्रथा से मुक्ति दिलाने वाले नायक के रूप में जानते हैं। अब्राहम लिंकन के बारे में ज्यादातर लोगों का ज्ञान यहीं तक होता है कि वह कड़ाके की सर्दी में लकड़ी के फट्टों से बने एक झोपड़े में पैदा हुए थे, मीलों चलकर पढ़ने के लिए किताबें उधार लेकर आते थे और रात में अंगीठी की या लुहार की दुकान में जल रही भट्टी की रोशनी में बैठकर पढ़ते थे। उन्होंने दुकानदार, पोस्ट मास्टर, सर्वेक्षक जैसी बहुत सी नौकरियां की। जीविका के लिए वह कुल्हाड़ी से लकड़ी काटने का काम करने लगे। उन्होंने सुअर काटने से लेकर लकड़हारे तक का काम किया, और खेतों में मजदूरी भी की।अपने शहर के सबसे ईमानदार वकील कहलाए, जज डगलस से यादगार बहस की और उसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बने, यहीं वह बातें हैं जो लोग अब्राहिम लिंकन के बारे में हम सब जानते हैं। उन्होंने ही अमेरिका में दास प्रथा (गुलामी प्रथा) का अंत किया था। उनका जन्म एक गरीब अश्वेत परिवार में 14 अप्रैल 1865 को हुआ था। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में गृह युद्ध के दौरान देश का नेतृत्व किया।

पहले निश्चित कर लो कि तुम्हारे पैर सही जगह पर पड़े हैं, तब सीधे खड़े हो।-अब्राहम लिंकन

उन्होंने दास प्रथा का अंत किया, सरकार और अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। वह सदैव सत्य और अच्छाई का पक्ष लेते थे। उन्होंने वकील के पेशे में हमेशा न्याय का साथ दिया। अन्याय का पक्ष उन्होंने कभी नही लिया। उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गयी।21 वर्ष की उम्र होते-होते आपने जीवन के कई अनसुलझे मसलों पर आन्दोलन कर सफलता अर्जित करी।

मैं एक धीमी गति से चलता ज़रूर हूँ, लेकिन कभी वापस नहीं चलता।-अब्राहम लिंकन

लिंकन ने अपने बेटे के शिक्षक को जीवन के समस्त पहलुओं को गहराई से सीखाने के लिए एक पत्र लिखा था।इस पत्र के कुछ अंश जो एक बालक की आधारभूत नींव रखने के लिए सर्वोत्कृष्ट है...!!

हे शिक्षक! 

मैं जानता हूं और मानता हूं 

कि न तो हर आदमी सही होता है 

और न ही होता है सच्चा; 

किंतु तुम्हें सिखाना होगा कि  

कौन बुरा है और कौन अच्छा  

दुष्ट व्यक्तियों के साथ-साथ आदर्श प्रणेता भी होते हैं, 

स्वार्थी राजनीतिज्ञों के साथ-साथ समर्पित नेता भी होते हैं,

दुश्मनों के साथ-साथ मित्र भी होते हैं 

हर विरूपता के साथ सुंदर चित्र भी होते हैं 

समय भले ही लग जाए, पर 

यदि सिखा सको तो उसे सिखाना  

कि पाए हुए पांच से अधिक मूल्यवान है -  

स्वयं एक कमाना  

पाई हुई हार को कैसे झेले, उसे यह भी सिखाना  

और साथ ही सिखाना, जीत की ख़ुशियां मनाना। 

यदि हो सके तो उसे ईर्ष्या या द्वेष से परे हटाना 

और जीवन में छुपी मौन मुस्कान का पाठ पढ़ाना। 

जितनी जल्दी हो सके उसे जानने देना  

कि दूसरों को आतंकित करने वाला स्वयं कमज़ोर होता है,  

वह भयभीत व चिंतित है 

क्योंकि उसके मन में स्वयं चोर होता है।

उसे दिखा सको तो दिखाना -

किताबों में छिपा खजाना।

और उसे वक़्त देना चिंता करने के लिए

कि आकाश के परे उड़ते पंछियों का आह्लाद

सूर्य के प्रकाश में मधुमक्खियों का निनाद

हरी-भरी पहाड़ियों से झांकते फूलों का संवाद

कितना विलक्षण होता है - अविस्मरणीय, अगाध

उसे यह भी सिखाना -

धोके से सफ़लता पाने से असफ़ल होना सम्माननीय है

और अपने विचारों पर भरोसा रखना अधिक विश्वसनीय है,

चाहें अन्य सभी उनको ग़लत ठहराएं 

परंतु स्वयं पर अपनी आस्था बनी रहे, यह विचारणीय है।

उसे यह भी सिखाना कि वह सदय का साथ सदय हो

किंतु कठोर के साथ हो कठोर।

और लकीर का फ़कीर बनकर

उस भीड़ के पीछे न भागे जो करती हो - निरर्थक शोर।

उसे सिखाना

कि वह सबकी सुनते हुए अपने मन की भी सुन सके,

हर तथ्य को सत्य की कसौटी पर कसकर गुन सके।

यदि सिखा सको तो सिखाना कि वह दुख में भी मुस्कुरा सके,

घनी वेदना से आहत हो, पर ख़ुशी के गीत गा सके। 

उसे यह भी सिखाना कि आंसू बहते हों तो उन्हें बहने दे,

इसमें कोई शर्म नहीं, कोई कुछ भी कहता हो, कहने दे।

उसे सिखाना -

कि वह सनकियों को कनखियों से हंसकर टाल सके

पर अत्यंत मृदुभाषी से बचने का खयाल रखे।

वह अपने बाहुबल व बुद्धिबल का अधिकतम मोल पहचान पाए,

परंतु अपने ह्र्दय व आत्मा की बोली न लगवाए।

वह भीड़ के शोर में भी अपने कान बंद कर सके

और स्वत: की अंतरात्मा की सही आवाज़ सुन सके।

सच के लिए लड़ सके और सच के लिए अड़ सके।

उसे सहानुभूति से समझाना, 

पर प्यार के अतिरेक से मत बहलाना।

क्योंकि तप-तप कर ही लोहा खरा बनता है,

ताप पाकर ही सोना निखरता है।

उसे साहस देना ताकि वक़्त पड़ने पर अधीर बने

सहनशील बनाना ताकि वह वीर बने।

उसे सिखाना कि वह स्वयं पर असीम विश्वास करे,

ताकि समस्त मानव जाति पर भरोसा व आस धरे।

यह एक बड़ा सा लंबा-चौड़ा अनुरोध है,

पर तुम कर सकते हो, क्या इसका तुम्हें बोध है?

मेरे और तुम्हारे...दोनों के साथ उसका रिश्ता है;

सच मानो, मेरा बेटा एक प्यारा-सा नन्हा सा फ़रिश्ता है।

(हिंदी भावानुवाद - मधु पंत)

Click here to download this poem as an image

आपके जीवन में कितने साल है ये मायने नही रखता है लेकिन बचे हुए सालो में आपका जीवन कितना है ये मायने रखता है।-अब्राहम लिंकन | 


Asha Soni

I am a science enthusiast and expert in science writing. I am also an expert in science teaching and communication. Innovation and new ideas are my favorite area. Nature thrills me and gives me more motivation to understand and think about science from a different perspective.

139 views

Recent Articles